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विदेश9 जून, 2026 | 11:48

एशिया की सबसे लंबी जोजिला सुरंग का ऐतिहासिक ‘ब्रेकथ्रू’ ब्लास्ट संपन्न, कश्मीर-लद्दाख कनेक्टिविटी में बड़ा कदम

जोजिला सुरंग का ब्रेकथ्रू ब्लास्ट: कश्मीर-लद्दाख को जोड़ने वाली अहम परियोजना

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जोजिला सुरंग का ब्रेकथ्रू ब्लास्ट: कश्मीर-लद्दाख को जोड़ने वाली अहम परियोजना

एशिया की सबसे लंबी जोजिला सुरंग का ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट आज संपन्न हुआ। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ब्लास्ट कर कश्मीर और लद्दाख के बीच बारहमासी संपर्क का रास्ता साफ किया।

एशिया की सबसे लंबी जोजिला सुरंग का ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट आज संपन्न हुआ

भारत के बुनियादी ढांचा विकास और सामरिक कनेक्टिविटी के लिहाज से आज एक ऐतिहासिक दिन है। एशिया की सबसे लंबी और ऊंचाई पर स्थित जोजिला सुरंग का महत्वपूर्ण ‘ब्रेकथ्रू’ ब्लास्ट सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस आखिरी ढाई मीटर के ब्लास्ट के साथ ही सुरंग के दोनों छोर आपस में जुड़ गए हैं। यह लगभग तेरह किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब (एकल नली) दो-तरफा सड़क सुरंग है, जो कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ेगी। इस अहम पड़ाव के बाद, दशकों पुराना वह सपना अब सच होने के बेहद करीब है, जिसमें भारी बर्फबारी के बावजूद लद्दाख देश के बाकी हिस्सों से पूरे साल जुड़ा रहेगा।

ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट से जुड़ी सुरंग

लद्दाख के मिनामार्ग में स्थित पूर्वी छोर पर आज यह बड़ा मुकाम हासिल किया गया। सुरंग की खुदाई का काम जोरों पर था और आखिरी हिस्से की चट्टान को एक नियंत्रित विस्फोट के जरिए तोड़ा गया। इस ब्लास्ट के साथ ही दोनों तरफ से हो रही खुदाई आपस में मिल गई, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ब्रेकथ्रू’ कहा जाता है। यह पल न केवल इंजीनियरों और मजदूरों की कड़ी मेहनत का नतीजा है, बल्कि इस जटिल हिमालयी क्षेत्र में निर्माण की एक बड़ी उपलब्धि भी है।

नितिन गडकरी ने किया रिमोट से ब्लास्ट

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस ऐतिहासिक पल की शुरुआत की। उन्होंने मिनामार्ग में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में रिमोट का बटन दबाकर सुरंग का अंतिम ब्लास्ट किया। इस खास अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह सुरंग आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है और लद्दाख के लोगों की सर्दियों की मुश्किलें अब खत्म होने वाली हैं।

लद्दाख और कश्मीर के बीच बारहमासी संपर्क

जोजिला दर्रा हमेशा से ही खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों के महीनों में बंद रहता था। इस वजह से लद्दाख का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से करीब छह महीने तक पूरी तरह से कट जाता था। लेकिन समुद्र तल से लगभग ग्यारह हजार पांच सौ अठहत्तर फीट की ऊंचाई पर बन रही इस नई सुरंग के चालू होने के बाद, यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। अब श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूरे साल और हर मौसम में सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा।

सफर के समय में होगी भारी बचत

इस सुरंग के निर्माण से केवल मौसम की बाधा ही दूर नहीं होगी, बल्कि यात्रा के समय में भी भारी कमी आएगी। फिलहाल जोजिला दर्रे के खतरनाक और बर्फीले घुमावदार रास्तों को पार करने में लोगों को एक से तीन घंटे तक का समय लग जाता था। सुरंग शुरू होने के बाद यह दूरी सिर्फ पंद्रह से बीस मिनट के सुरक्षित सफर में सिमट जाएगी। यह आम नागरिकों, पर्यटकों और माल ढुलाई करने वाले वाहनों के लिए एक बहुत बड़ी और सुरक्षित सुविधा होगी।

सेना और आम लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा

सामरिक दृष्टि से भी जोजिला सुरंग भारत के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव साबित होने वाली है। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से लगे लद्दाख क्षेत्र में भारतीय सेना को रसद, हथियार और सैनिकों की आवाजाही के लिए हमेशा खुला रास्ता चाहिए होता है। इस सुरंग के जरिए सशस्त्र बल अत्यधिक सर्दियों में भी तेजी से अपनी रणनीतिक पहुंच बना सकेंगे। इसके अलावा, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी इस बारहमासी रास्ते से जबरदस्त पंख लगेंगे, जिससे लद्दाख की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।

आधुनिक तकनीक और निर्माण की चुनौतियां

हिमालय के इस संवेदनशील और भूगर्भीय रूप से अस्थिर क्षेत्र में निर्माण करना आसान काम नहीं था। कार्यदायी संस्था मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड यानी एक विशेष सुरक्षित खुदाई तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक के कारण अस्थिर चट्टानों के ढहने और पानी के रिसाव जैसी जटिल चुनौतियों से निपटना संभव हो सका। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे के तापमान के बावजूद हजारों इंजीनियरों और श्रमिकों ने यहां दिन-रात काम किया है।

निवेश और रोजगार के नए अवसर

इस विशाल राष्ट्रीय परियोजना को पूरा करने में करीब छह हजार आठ सौ करोड़ रुपये की भारी लागत आ रही है। इस सुरंग के निर्माण कार्य ने स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। स्थानीय नेताओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस ब्रेकथ्रू को एक ऐतिहासिक जीत बताया है। उनका मानना है कि बेहतर सड़कों और सुरंग के बन जाने से चिकित्सा और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी दूरदराज के इलाकों तक आसानी से पहुंच सकेंगी।

परियोजना के बचे हुए काम और डेडलाइन

अधिकारियों के अनुसार, सुरंग की खुदाई और ब्रेकथ्रू का काम तय समय से छह महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में परियोजना का लगभग पच्चासी प्रतिशत काम खत्म हो चुका है। अब अगले सात से आठ महीनों तक सुरंग के अंदर सड़क पक्की करने, कंक्रीट की परत चढ़ाने और हवा के वेंटिलेशन सिस्टम जैसे सिविल कार्य किए जाएंगे। इसके बाद इलेक्ट्रो-मैकेनिकल और बिजली का काम होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम को उम्मीद है कि फरवरी दो हजार अट्ठाइस तक यह सुरंग आम जनता के लिए पूरी तरह से खोल दी जाएगी।

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