सैटेलाइट तस्वीरों से बड़ा खुलासा: पैंगोंग झील के पास चीन का निर्माण हुआ तेज, बफर जोन में बनाईं नई इमारतें

पैंगोंग झील के पास चीन का निर्माण तेज होने की खबर सैटेलाइट तस्वीरों से मिली है। बफर जोन के पास नई पक्की इमारतें बनाकर चीन नई साजिश रच रहा है।
पैंगोंग झील के पास चीन का निर्माण
पैंगोंग झील के पास चीन का निर्माण तेजी से बढ़ने का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हाल ही में जारी की गई नई सैटेलाइट तस्वीरों यानी कृत्रिम उपग्रह से ली गई तस्वीरों से पता चला है कि चीनी सेना विवादित पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में बफर जोन यानी दोनों देशों की सेनाओं के बीच खाली छोड़े गए इलाके के बेहद करीब नए पक्के मकान और सैन्य ढांचे तैयार कर रही है।
आसमान से ली गई इन तस्वीरों से साफ जाहिर होता है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी वहां की सेना सीमा पर अपनी ताकत को स्थायी रूप से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इस नए घटनाक्रम के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और रक्षा विशेषज्ञों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं क्योंकि यह निर्माण बेहद संवेदनशील क्षेत्र में हो रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुली पोल
अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़ी एक निजी एजेंसी वेंटोर द्वारा जारी की गई नई तस्वीरों ने चीन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर चीनी सेना बड़े पैमाने पर खुदाई और निर्माण कार्य कर रही है। यह जगह उस इलाके के बेहद नजदीक है जहां साल 2020 में दोनों देशों के सैनिकों के बीच भारी हिंसक झड़प हुई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन तस्वीरों में कई कंक्रीट की इमारतें बनती हुई दिखाई दे रही हैं, जो कुछ ही महीनों के भीतर खड़ी की गई हैं। तस्वीरों से यह भी पता चलता है कि वहां निर्माण सामग्री और भारी गाड़ियां लगातार काम में लगी हुई हैं। चीन ने इस दुर्गम इलाके में सड़कों का जाल भी पहले से ज्यादा मजबूत कर लिया है।
पैंगोंग झील के पास चीन का निर्माण
वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के पास हो रहा यह निर्माण चीन की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पैंगोंग झील के पास चीन का निर्माण कार्य पिछले साल के आखिरी महीनों में बहुत तेजी से शुरू हुआ था, जो अब साल 2026 में पूरी तरह आकार लेता दिख रहा है। यह निर्माण ठीक उसी जगह के पास है जिसे सिरीजाप पोस्ट कहा जाता है और जो 1962 के युद्ध के बाद से चीन के नियंत्रण में है।
इस निर्माण कार्य के जरिए चीन इस विवादित क्षेत्र पर अपना स्थायी दावा ठोकना चाहता है। कूटनीतिक बातचीत के दौरान चीन हमेशा शांति की बातें करता है लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी हरकतें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि चीन इन पक्के ढांचों के जरिए अपनी सेना को सीमा के बिल्कुल करीब तैनात रखने की क्षमता बढ़ा रहा है।
सर्दियों में भी रुकने का इंतजाम
लद्दाख के इस इलाके में सर्दियों के मौसम में तापमान शून्य से 30 डिग्री नीचे तक चला जाता है और झील का पानी पूरी तरह जम जाता है। ऐसे कड़ाके की ठंड में सैनिकों का तंबू या अस्थायी ठिकानों में रहना बहुत मुश्किल होता है। चीन द्वारा बनाई जा रही ये नई इमारतें पूरी तरह से आधुनिक और मौसम के अनुकूल हैं, जिनमें सैनिक साल भर आसानी से रह सकते हैं।
इन पक्की इमारतों के बन जाने से चीनी सैनिकों को भारी ठंड में पीछे हटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, सैटेलाइट तस्वीरों में झील के किनारे नावों को खड़ा करने के लिए जेट्टी यानी घाट जैसी संरचना भी देखी गई है। सर्दियों में झील जमने के कारण अभी इन नावों को ढककर किनारे रखा गया है, लेकिन गर्मियों में इनका इस्तेमाल सैनिकों को लाने और ले जाने में किया जाता है।
पुराने समझौते को बड़ा झटका
साल 2020 के सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई थी। इस बातचीत के बाद दोनों देशों की सेनाएं टकराव वाली जगहों से पीछे हटने पर सहमत हुई थीं। इस समझौते के तहत ही बफर जोन बनाए गए थे ताकि दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने न आएं और दोबारा कोई हिंसक झड़प न हो।
चीन का यह नया कदम उस समझौते की भावना को सीधे तौर पर ठेस पहुंचाता है। हालांकि यह निर्माण कार्य तकनीकी रूप से चीन के कब्जे वाले हिस्से में हो रहा है, लेकिन बफर जोन से इसकी दूरी महज कुछ मीटर ही है। इतनी कम दूरी पर भारी सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास करना भारत की सुरक्षा के लिए एक सीधा और बड़ा खतरा पैदा करता है।
भारतीय सेना की पैनी नजर
भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियां चीन की इस हर चाल पर लगातार और बहुत पैनी नजर बनाए हुए हैं। भारतीय सैनिक भी अपनी तरफ की सीमाओं पर पूरी तरह मुस्तैद हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। भारत ने भी पिछले कुछ सालों में लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, पुलों और हवाई पट्टियों का निर्माण बहुत तेजी से पूरा किया है।
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भारत अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। चीनी सेना की गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सेना ने भी अग्रिम चौकियों पर सैनिकों की तैनाती और निगरानी उपकरणों को अपग्रेड यानी पहले से ज्यादा आधुनिक कर दिया है। भारतीय रडार और टोही विमान लगातार सीमा पार की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे हैं।
कूटनीतिक स्तर पर बढ़ेगा तनाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नए खुलासे के बाद भारत और चीन के बीच चल रही बातचीत के दौर पर बुरा असर पड़ सकता है। भारत हमेशा से यह मांग करता रहा है कि सीमा पर शांति बहाली के लिए चीन को अप्रैल 2020 से पहले वाली स्थिति में वापस जाना होगा। लेकिन चीन नई इमारतें बनाकर यह साफ संदेश दे रहा है कि वह पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच सैन्य कमांडरों के स्तर की बैठक में तीखी बहस होने की पूरी संभावना है। भारत कूटनीतिक मंचों पर चीन के इस रवैये का कड़ा विरोध दर्ज करा सकता है। दोनों पड़ोसियों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक संबंध पहले ही तनावपूर्ण चल रहे हैं, और इस नई चाल से यह कड़वाहट और ज्यादा बढ़ सकती है।


