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देश9 जून, 2026 | 19:48

मध्य प्रदेश में क्रॉस वोटिंग का डर: कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों को भेजा बेंगलुरु

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का डर बढ़ गया है। पार्टी ने टूट से बचने के लिए अपने 35 विधायकों को अचानक बेंगलुरु भेज दिया है।

देश वार्ताहर

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एमपी राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग का डर, कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु भेजा

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का डर बढ़ गया है। पार्टी ने टूट से बचने के लिए अपने 35 विधायकों को अचानक बेंगलुरु भेज दिया है।

क्रॉस वोटिंग का डर,

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भारी हलचल शुरू हो गई है। राज्यसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी के अंदर क्रॉस वोटिंग का डर (अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर दूसरी पार्टी को वोट देना) साफ दिखाई दे रहा है। इसी घबराहट में कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों को अचानक हवाई जहाज से बेंगलुरु भेज दिया है।

राज्यसभा चुनाव और क्रॉस वोटिंग का डर

राज्य में राज्यसभा की खाली सीटों के लिए मतदान होना है। इस चुनाव में हर एक वोट की कीमत बहुत ज्यादा है। कांग्रेस आलाकमान को अंदेशा है कि भारतीय जनता पार्टी उनके विधायकों से संपर्क साध सकती है। इसी वजह से चुनाव से ठीक पहले यह बड़ा कदम उठाया गया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आपात बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विधायकों की वफादारी और वोटों के गणित पर लंबी चर्चा हुई। नेताओं को लगा कि यदि विधायक भोपाल में रहे, तो विरोधी दल उन पर दबाव बना सकता है। इसीलिए सभी को राज्य से बाहर भेजने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।

विधायकों की घेराबंदी और बेंगलुरु रवानगी

कांग्रेस के 35 विधायकों को कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष विमान से बेंगलुरु ले जाया गया है। वहां उन्हें एक प्रसिद्ध रिजॉर्ट (सैरगाह) में ठहराया गया है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं को इन विधायकों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विधायकों के मोबाइल फोन भी कथित तौर पर बंद करवा दिए गए हैं। रिजॉर्ट के आसपास किसी भी बाहरी व्यक्ति या मीडिया को जाने की अनुमति नहीं है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मतदान के दिन ही इन सभी विधायकों को सीधे भोपाल लाया जाएगा।

मध्य प्रदेश विधानसभा का गणित

मध्य प्रदेश विधानसभा में सीटों का समीकरण काफी दिलचस्प है। सत्ताधारी दल के पास पूर्ण बहुमत है, लेकिन राज्यसभा की अतिरिक्त सीट जीतने के लिए उसे कुछ और वोटों की जरूरत है। वहीं कांग्रेस के पास अपनी सीट सुरक्षित रखने के लिए पूरे वोट मौजूद हैं।

इसके बावजूद कांग्रेस कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं दिख रही है। पिछले कुछ सालों में राज्य में हुए दलबदल ने पार्टी को काफी सतर्क कर दिया है। नेताओं को डर है कि इतिहास खुद को दोबारा न दोहरा दे। इसीलिए एक-एक विधायक की सुरक्षा और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

कांग्रेस और भाजपा में जुबानी जंग

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी बेहद तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर उसके विधायकों को खरीदना चाहती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्होंने अपने विधायकों को सुरक्षित स्थान पर भेजा है।

दूसरी तरफ भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है। उनका दावा है कि कांग्रेस के अंदर भारी सिरफुटौव्वल मची हुई है और वे अपनी नाकामी को छिपाने के लिए भाजपा पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।

रिजॉर्ट राजनीति पर जनता की नजर

राज्य की आम जनता इस पूरे मामले को बहुत ध्यान से देख रही है। सोशल मीडिया पर भी इस ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ (विधायकों को होटल में बंद रखने की राजनीति) को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लोग इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की गिरावट से जोड़कर देख रहे हैं।

गांव और कस्बाई इलाकों के मतदाताओं का कहना है कि उन्होंने विधायकों को अपने क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए चुना था। लेकिन अब वे विधायक चुनाव जीतने के लिए दूसरे राज्य के होटलों में बंद हैं। इससे जनता के बीच राजनेताओं के प्रति अविश्वास की भावना पैदा हो रही है।

चुनाव आयोग की तैयारियों पर असर

इस राजनीतिक उठापटक के बीच चुनाव आयोग ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। भोपाल में विधानसभा भवन के अंदर मतदान केंद्र बनाया गया है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मतदान पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जाएगा।

वोटिंग के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी और हर एक गतिविधि की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आयोग ने सभी दलों को चुनाव नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि बेंगलुरु गए विधायक सही समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाने भोपाल पहुंचते हैं या नहीं।

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