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देश10 जून, 2026 | 07:41

SEO हिंदी हेडलाइन मध्य प्रदेश में दो बच्चों वाला नियम खत्म: सरकारी नौकरी के लिए मोहन यादव सरकार का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश में दो बच्चों वाला नियम खत्म: सरकारी नौकरी के लिए मोहन यादव सरकार का ऐतिहासिक फैसला

देश वार्ताहर

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दो बच्चों वाला नियम पूरी तरह खत्म

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए दो बच्चों वाला नियम पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब दो से अधिक बच्चों वाले भी आवेदन कर सकेंगे।

मध्य प्रदेश में दो बच्चों वाला नियम खत्म:

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं और कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार ने शासकीय सेवाओं में दो बच्चों वाला नियम पूरी तरह खत्म करने का एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस फैसले के बाद अब दो से ज्यादा संतान वाले उम्मीदवार भी बेझिझक सरकारी पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री का बड़ा और कड़ा फैसला

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग को आदेश दिया है कि भर्ती नियमों के नए मसौदे से इस पाबंदी को तुरंत हटाया जाए। सरकार ने आधिकारिक सरकारी पोर्टल से इस विवादित नियम वाले प्रारूप को हटाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री के इस फैसले से प्रदेश के लाखों ऐसे परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो तीसरी संतान होने के कारण सरकारी नौकरियों की दौड़ से बाहर हो गए थे। सरकार का मानना है कि किसी भी नागरिक को बच्चों की संख्या के आधार पर आजीविका के समान अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इस मानवीय दृष्टिकोण के कारण ही मुख्यमंत्री ने इस पुराने नियम को तुरंत बदलने का निर्णय लिया।

सालों पुराना दो बच्चों वाला नियम खत्म

मध्य प्रदेश में यह पाबंदी कोई नई बात नहीं थी बल्कि दशकों से चली आ रही थी। साल 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस कड़े कानून को लागू किया था। उस समय नियम बनाया गया था कि 26 जनवरी 2001 के बाद जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे होंगे, वे सरकारी सेवा के पात्र नहीं माने जाएंगे।

पिछले 25 सालों से इस नियम के कारण कई योग्य उम्मीदवारों को अपनी मनपसंद नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। इतना ही नहीं, जो लोग पहले से नौकरी में थे, उनके घर तीसरी संतान होने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने या विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ता था। इस वजह से कर्मचारियों में लगातार डर और असंतोष का माहौल बना रहता था जिसे अब मुख्यमंत्री ने पूरी तरह खत्म कर दिया है।

नए भर्ती नियमों में हुआ बड़ा बदलाव

दरअसल, हाल ही में राज्य सरकार ने ‘मध्य प्रदेश सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026’ का एक नया मसौदा यानी ड्राफ्ट तैयार किया था। इस नए मसौदे को लेकर सरकार ने आम जनता और विशेषज्ञों से 15 जून 2026 तक उनके सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। इस नए प्रारूप में भी पुरानी परंपरा को दोहराते हुए दो बच्चों वाली पाबंदी को वापस जोड़ दिया गया था।

जैसे ही यह बात मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान में आई, उन्होंने इस पर तुरंत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के जनविरोधी प्रावधानों की नए नियमों में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि इस विवादित शर्त को पूरी तरह से विलोपित यानी हटाकर नया और साफ सुथरा मसौदा दोबारा प्रकाशित किया जाए।

उम्मीदवारों और कर्मचारियों को बड़ी राहत

सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन युवाओं को मिलेगा जो दिन-रात सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में कई प्रतिभावान युवाओं के दो से अधिक बच्चे होते हैं, जिससे वे योग्यता होने के बावजूद आवेदन नहीं कर पाते थे। अब उनके सामने से यह बड़ी कानूनी अड़चन हमेशा के लिए दूर हो गई है।

इसके साथ ही यह फैसला उन मौजूदा कर्मचारियों के लिए भी संजीवनी जैसा है जो सेवा में रहते हुए तीसरी संतान के कारण संकट का सामना कर रहे थे। पुराने नियमों के तहत दो से अधिक बच्चे होने को प्रशासनिक आचरण के खिलाफ यानी एक तरह का कदाचार माना जाता था। अब इस श्रेणी को ही खत्म कर दिया गया है जिससे सेवारत कर्मचारियों की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित हो गई है।

अब नौकरी में नहीं आएगी कोई अड़चन

प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले की काफी सराहना की जा रही है क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सरलता आएगी। कई बार इस नियम के कारण नियुक्तियां सालों तक अदालती मुकदमों में फंसी रहती थीं। योग्य उम्मीदवार चयन होने के बाद भी केवल बच्चों की संख्या की वजह से ज्वाइन नहीं कर पाते थे और सीटें खाली रह जाती थीं।

अब सरकार के इस साफ निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग नए सिरे से नियमों की नियमावली तैयार कर रहा है। आने वाले समय में जो भी नई सरकारी भर्तियां निकलेंगी, उनमें इस तरह की कोई भी शर्त नहीं रखी जाएगी। युवा बिना किसी डर या मानसिक तनाव के अपनी परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे और अपनी योग्यता के दम पर पद हासिल कर सकेंगे।

साल 2001 से लागू था पुराना कानून

अगर इतिहास पर नजर डालें तो साल 2001 में इस नियम को लागू करते समय यह तर्क दिया गया था कि इससे समाज में छोटा परिवार सुखी परिवार का संदेश जाएगा। लेकिन समय के साथ यह देखा गया कि इस नियम ने जनसंख्या नियंत्रण में तो कोई खास भूमिका नहीं निभाई, बल्कि गरीब और मध्यम वर्ग के नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत जरूर खड़ी कर दी।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों ने भी इस व्यावहारिक समस्या को समझा था और अपने नियमों में पहले ही ढील दे दी थी। अब मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने भी इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए एक प्रगतिशील और संवेदनशील फैसला लिया है। इस निर्णय से राज्य के युवाओं में एक नया उत्साह देखा जा रहा है और वे सरकार के इस कदम का स्वागत कर रहे हैं।

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