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देश9 जून, 2026 | 11:17

INDIA ब्लॉक मीटिंग: ममता बनर्जी के बदले तेवर और ‘कॉकरोच पार्टी’ की चर्चा

INDIA ब्लॉक मीटिंग: ममता बनर्जी के बदले तेवर और ‘कॉकरोच पार्टी’ की चर्चा

देश वार्ताहर

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ममता के बदले तेवर, 'कॉकरोच पार्टी' की गूंज... INDIA ब्लॉक की मीटिंग

विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की अहम बैठक में ममता बनर्जी के बदले तेवर और युवाओं की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ मुख्य चर्चा का विषय रहे

INDIA ब्लॉक मीटिंग: ममता बनर्जी के बदले तेवर और ‘कॉकरोच पार्टी’ की चर्चा

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की अहम बैठक हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुई। इस बार की बैठक में कई नए राजनीतिक समीकरण और नेताओं के बदले हुए तेवर देखने को मिले। दिल्ली में जुटे तमाम बड़े विपक्षी नेताओं के बीच सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नए रुख को लेकर रही।

इसके अलावा, युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) भी इस पूरी बैठक के दौरान छाई रही। हाल ही में हुए चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद बुलाई गई इस बैठक का माहौल पिछली मुलाकातों से काफी अलग था।

विपक्ष की बैठक में नया मुद्दा

बैठक के तय आधिकारिक एजेंडे में कॉकरोच जनता पार्टी का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन चर्चा के दौरान यही मुद्दा हावी रहा। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे एक सोशल मीडिया कैंपेन युवाओं की नाराजगी और बेरोजगारी के मुद्दे पर इतना बड़ा रूप ले चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद इस पार्टी की शुरुआत एक डिजिटल व्यंग्य के रूप में हुई थी। लेकिन अब यह परीक्षा में हुई कथित धांधली और रोजगार के सवाल पर एक राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के भारी प्रदर्शन ने बड़े राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

ममता बनर्जी ने किया खुला समर्थन

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से सत्ता गंवाने के बाद बैकफुट पर नजर आ रही ममता बनर्जी ने इस बैठक में अलग ही रुख अपनाया। कभी गठबंधन में कांग्रेस के नेतृत्व को चुनौती देने वाली ममता इस बार काफी शांत और संयमित दिखीं।

ममता बनर्जी ने खुले तौर पर कहा कि राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन समाज में उठ रहे ऐसे नागरिक और युवा आंदोलनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उनकी पार्टी के नेताओं ने भी माना है कि ममता बनर्जी अब जमीनी स्तर पर युवाओं के इस भारी असंतोष को अपने समर्थन से नई दिशा देना चाहती हैं।

युवाओं के आंदोलन पर मंथन

बैठक में मौजूद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी इस आंदोलन पर अपनी गहरी चिंता और राय रखी। ठाकरे ने सहयोगियों से सीधा सवाल पूछा कि क्या इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का एक नए प्लेटफार्म से जुड़ना यह दिखाता है कि उनका विपक्ष से अब भरोसा उठ गया है।

वहीं, उमर अब्दुल्ला का नजरिया थोड़ा अलग था। उनका मानना था कि विपक्ष को इन आक्रोशित युवाओं से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लाखों युवा इस मुहिम से जुड़ रहे हैं, तो वे निश्चित रूप से कुछ सही कर रहे हैं और हमें उनकी आवाज सुननी चाहिए।

गठबंधन के भीतर उठते सवाल

इस बैठक में सिर्फ युवाओं के मुद्दों पर ही बात नहीं हुई, बल्कि राजनीतिक गठजोड़ को लेकर भी भारी आपसी खींचतान देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस नेतृत्व को सीधी सलाह दी कि उन्हें गठबंधन में बड़ा दिल दिखाना चाहिए।

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय पार्टियां खुलेआम कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात स्वीकार करती हैं, लेकिन कांग्रेस की तरफ से अक्सर वैसी गर्मजोशी नहीं दिखती। उनका यह बयान अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर काफी अहम माना जा रहा है। उनकी इस बात का एनसीपी (शरद पवार गुट) और वामपंथी नेताओं ने भी समर्थन किया।

राजनीतिक समीकरणों में बदलाव

हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों ने ‘इंडिया’ ब्लॉक के भीतर कई पुराने समीकरणों को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच भी तनातनी साफ नजर आ रही है। केरल में कांग्रेस ने वामदलों को सत्ता से बाहर कर दिया है, जिसके बाद सीपीआई (एम) के नेता चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस से जवाब मांग रहे हैं।

दक्षिण भारत की राजनीति का असर भी इस बैठक पर पड़ा। तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा अभिनेता विजय की नवगठित पार्टी टीवीके (TVK) के साथ जाने के बाद, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने गठबंधन से अपनी राहें अलग कर ली हैं। डीएमके का कोई भी प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल नहीं हुआ, जिसे गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

आगे की रणनीति पर फोकस

बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने अंततः इस बात पर सहमति जताई कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपक्ष अच्छी तरह समझ चुका है कि बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर नई पीढ़ी में जबरदस्त आक्रोश है।

आने वाले समय में विपक्षी दल इस ‘कॉकरोच’ आंदोलन से निकलने वाले संदेश को अपनी मुख्य राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बना सकते हैं। नेताओं का मानना है कि युवाओं के इस डिजिटल विद्रोह को अगर सही तरीके से राजनीतिक मंच मिला, तो यह आगामी चुनावों में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव ला सकता है।

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