गाजीपुर एनकाउंटर पर तनावपूर्ण हुई यूपी की सियासत, योगी के मंत्री संजय निषाद ने दी राजनीतिक नुकसान की चेतावनी

गाजीपुर एनकाउंटर के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक नुकसान की चेतावनी दी है।
गाजीपुर एनकाउंटर पर तनावपूर्ण हुई यूपी की सियास
उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए गाजीपुर एनकाउंटर ने राज्य की कानून व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी भारी हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ विपक्षी दल लगातार हमलावर हैं, तो वहीं अब सत्ता पक्ष के सहयोगी दल भी पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नुकसान का बड़ा कारण बताया है।
मछुआरा समुदाय और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने अपनी ही गठबंधन सरकार की पुलिस कार्यप्रणाली पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि पुलिस और प्रशासन की यह मनमानी इसी तरह चलती रही, तो भविष्य में इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उनका यह बेबाक बयान भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ा चेतावनी भरा संकेत माना जा रहा है।
सहयोगी दल के कड़े रुख से गरमाई सियासत
गाजीपुर में कमलेश बिंद के एनकाउंटर के बाद से सत्ताधारी गठबंधन के भीतर तनाव की स्थिति देखी जा रही है। संजय निषाद का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से समाज का एक बड़ा वर्ग सरकार से नाराज हो रहा है। उन्होंने मंच से खुले तौर पर कहा कि अगर समाज के लोग ही उनके साथ नहीं रहेंगे, तो फिर वह कैसी राजनीति करेंगे।
मंत्री ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका दावा है कि जिस व्यक्ति का एनकाउंटर किया गया, वह विनीत राय हत्या के मामले में मुख्य आरोपी नहीं था। उन्होंने इसे अपने समाज के वोट बैंक को खराब करने और जनाधार को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर मंत्री ने दागे सवाल
एनकाउंटर की इस पूरी घटना को लेकर संजय निषाद ने गाजीपुर पुलिस की मंशा पर सीधा प्रहार किया है। उनका कहना है कि जब व्यक्ति के खिलाफ पहले से कोई बड़ा आपराधिक इतिहास या न्यायालय द्वारा दी गई सजा नहीं थी, तो सीधे गोली क्यों मारी गई। मंत्री ने पूछा कि क्या पुलिस को आत्मसमर्पण का उचित मौका नहीं देना चाहिए था।
इस मामले में पुलिस के खुफिया विभाग (एलआईयू) की नाकामी का मुद्दा भी उठाया गया है। संजय निषाद ने सवाल किया कि जब इलाके में आक्रोश फैल रहा था और लोग विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे, तो पुलिस का खुफिया तंत्र क्या कर रहा था। समय रहते लोगों के गुस्से को शांत करने की कोशिश क्यों नहीं की गई।
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर दी चुनौती
संजय निषाद ने अपने बयान में गाजीपुर पुलिस कप्तान को खुली चुनौती दे डाली है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस का यह गाजीपुर एनकाउंटर वास्तव में न्यायसंगत और निष्पक्ष है, तो पुलिस हत्याकांड के दोनों मुख्य आरोपियों का भी एनकाउंटर करके दिखाए। उनका सीधा आरोप है कि पुलिस केवल कमजोर लोगों को अपना निशाना बना रही है।
मंत्री ने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, लेकिन चुन-चुन कर कार्रवाई करने से जनता में गलत संदेश जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली अपराधियों को पकड़ने के बजाय पुलिस ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई कर रही है जो केवल नाममात्र के सह-आरोपी बनाए गए थे।
वोट बैंक और जनाधार खिसकने की उठी चिंता
एनडीए गठबंधन के अहम सहयोगी होने के नाते संजय निषाद ने इस पूरी घटना को राजनीतिक चश्मे से भी देखा है। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के पुलिस एनकाउंटर से समाज में सरकार की छवि खराब होती है और वोटरों का टूटता है। निषाद पार्टी का मुख्य जनाधार इसी समुदाय से आता है।
मंत्री ने चेतावनी दी है कि पुलिस की एकतरफा कार्रवाई सीधे तौर पर उनके राजनीतिक आधार को गहरी चोट पहुंचा रही है। स्थानीय लोगों में यह धारणा बन रही है कि पिछड़े और कमजोर वर्ग के लोगों को न्याय के नाम पर सताया जा रहा है। इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा और स्थानीय चुनावों पर पड़ सकता है।
मृतक की पत्नी के गंभीर आरोपों का किया जिक्र
इस पूरे घटनाक्रम में मृतक की पत्नी के बयानों ने मामले को और भी ज्यादा पेचीदा बना दिया है। संजय निषाद ने मृतक कमलेश बिंद की पत्नी के उन गंभीर आरोपों का हवाला दिया जिसमें उसने कहा था कि पुलिस उसके पति को पहले पकड़कर थाने ले गई थी। पत्नी का दावा है कि उसके सामने ही थाने में पति की बुरी तरह पिटाई की गई थी।
अगर पत्नी के ये आरोप सही हैं, तो यह एनकाउंटर की पुलिस थ्योरी पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। मंत्री ने कहा कि एक नागरिक होने के नाते मृतक के परिवार को भी न्याय मांगने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में पिटाई के बाद इस तरह एनकाउंटर में मार गिराने की बातें लोकतंत्र के लिए बेहद डरावनी हैं।
विपक्ष को भी मिला सत्ता पक्ष को घेरने का मौका
संजय निषाद की इस खुली बगावत से समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा राजनीतिक हथियार मिल गया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने भी इस एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।
विपक्ष का आरोप है कि राज्य में कानून का राज पूरी तरह से खत्म हो चुका है और पुलिस केवल सत्ता के इशारे पर काम कर रही है। डिंपल यादव ने सवाल उठाया है कि जब पुलिस आरोपी को जिंदा पकड़ सकती थी, तो फिर एनकाउंटर करने की क्या आवश्यकता आ पड़ी। विपक्ष और सहयोगी दल के सुर एक होने से राज्य सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
जमीनी स्थितियों की गंभीरता को भांपते हुए संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने पूरे मामले की किसी सक्षम और उच्च स्तरीय एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराने की सख्त मांग रखी है। मंत्री चाहते हैं कि इस मामले का पूरा सच पारदर्शी तरीके से आम जनता के सामने आए।
उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर स्थानीय लोगों के भारी गुस्से और समुदाय की आहत भावनाओं से भी उन्हें अवगत कराया है। संजय निषाद का स्पष्ट कहना है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।


