‘शिकारियों को पकड़ने के बजाय खुद शिकारी बने मंत्री’, भूपेंद्र यादव की बागी टीएमसी सांसदों से मुलाकात पर कांग्रेस का बड़ा तंज

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की बागी टीएमसी सांसदों से मुलाकात पर कांग्रेस ने तीखा तंज कसा है। कांग्रेस ने कहा कि मंत्री खुद शिकारी बन रहे हैं।
भूपेंद्र यादव की बागी टीएमसी सांसदों से मुलाकात पर कांग्रेस का तंज
देश की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीर खूब चल रहे हैं। विपक्षी गठबंधन के भीतर और बाहर शह-मात का खेल जारी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की बागी टीएमसी सांसदों से मुलाकात ने एक नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुलाकात की खबरें बाहर आते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोल दिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुलाकात को लेकर सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि जो मंत्री देश के संसाधनों और नियमों की रक्षा के लिए जिम्मेदार हैं, वे खुद राजनीतिक शिकार करने में व्यस्त हैं। इस बयान के बाद दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है।
कांग्रेस ने बोला तीखा हमला
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार के मंत्री अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह भूल चुके हैं। उनका पूरा ध्यान विपक्ष की सरकारों को अस्थिर करने और विपक्षी दलों में फूट डालने पर केंद्रित हो गया है।
पार्टी के अनुसार, पर्यावरण और अन्य महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले मंत्री का काम नियमों का पालन करवाना है। लेकिन वे खुद दूसरे दलों के असंतुष्ट नेताओं को अपनी तरफ खींचने की मुहिम में जुट गए हैं। यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पूरी तरह खिलाफ है।
भूपेंद्र यादव की बागी टीएमसी सांसदों से मुलाकात के सियासी मायने
राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ समय से अंदरूनी खींचतान की खबरें लगातार आ रही थीं। ऐसे में बीजेपी के एक कद्दावर नेता का उन बागी सांसदों से मिलना साधारण घटना नहीं है।
माना जा रहा है कि बीजेपी बंगाल में टीएमसी के भीतर मचे घमासान का पूरा राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी तो सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश बताया है।
विपक्ष के गठबंधन में खलबली
इस पूरी घटना ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के भीतर भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। टीएमसी के सांसदों की इस हरकत से गठबंधन के अन्य दल भी असहज महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी सहयोगी पार्टी को भी एक परोक्ष संदेश दे दिया है।
गठबंधन के कुछ नेताओं का मानना है कि क्षेत्रीय दलों को अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रखने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अगर उनके अपने लोग ही पाला बदलने को तैयार बैठे हैं, तो केंद्र सरकार पर दोष मढ़ने से कोई बड़ा फायदा नहीं होने वाला है।
बीजेपी की नई रणनीति पर सवाल
बीजेपी इस समय विपक्षी खेमे में लगी सेंध को अपनी एक बड़ी रणनीतिक कामयाबी के रूप में देख रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि टीएमसी के बागी सांसदों के सहयोग से वे बंगाल में ममता बनर्जी के किले को आसानी से भेद सकते हैं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इस रणनीति को अनैतिक करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियों के डर और प्रलोभन के दम पर बनाई जाने वाली राजनीतिक बढ़त ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकती। जनता सब कुछ बहुत करीब से देख रही है और समय आने पर इसका करारा जवाब देगी।
दिल्ली से बंगाल तक हलचल
मुलाकात की टाइमिंग को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। संसद सत्र के ठीक पहले इस तरह की बैठक होना यह दिखाता है कि सदन के भीतर भी विपक्ष को कमजोर करने की एक बड़ी योजना पर काम चल रहा है।
कोलकाता में टीएमसी का शीर्ष नेतृत्व भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। पार्टी ने अपने सभी सांसदों को सख्त हिदायत दी है कि वे किसी भी विपक्षी नेता के झांसे में न आएं। टीएमसी ने कांग्रेस के इस तंज पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नेताओं की तीखी बयानबाजी तेज
आने वाले दिनों में यह विवाद थमने के बजाय और ज्यादा बढ़ने के आसार दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को संसद के भीतर भी उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि मंत्रियों को अपने मूल काम पर ध्यान देना चाहिए, न कि जोड़-तोड़ की राजनीति में समय बिताना चाहिए।
बीजेपी के प्रवक्ताओं ने कांग्रेस के आरोपों को उनकी हताशा का परिणाम बताया है। बीजेपी का कहना है कि देश के विकास से प्रभावित होकर अगर कोई नेता उनसे जुड़ना चाहता है, तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। फिलहाल इस सियासी जंग में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी से जारी है।


