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देश10 जून, 2026 | 07:45

रामलला के चढ़ावे का हिसाब कैसे रखा जाता है और कहाँ दिखी गड़बड़ी, जानें राम मंदिर विवाद की पूरी सच्चाई

रामलला के चढ़ावे का हिसाब कैसे रखा जाता है और कहाँ दिखी गड़बड़ी, जानें राम मंदिर विवाद की पूरी सच्चाई

देश वार्ताहर

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रामलला के चढ़ावे का हिसाब: अयोध्या राम मंदिर में गड़बड़ी के दावों की सच्चाई

अयोध्या राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे का हिसाब-किताब कैसे होता है? जानें दान पेटियों से करोड़ों रुपये गायब होने के आरोपों और ट्रस्ट की सफाई की पूरी सच्चाई।

अयोध्या राम मंदिर में गड़बड़ी के दावों की सच्चाई

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे का हिसाब अब देश की राजनीति और आम जनता के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने मंदिर के खजाने में करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी होने की गंभीर आशंका जताई है। इन आरोपों के सामने आने के बाद से श्रद्धालुओं के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं कि आखिर मंदिर को मिलने वाले दान का प्रबंधन कैसे होता है।

दान राशि पर छिड़ा नया सियासी विवाद

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर मंदिर प्रशासन को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का दावा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान पेटियों में चढ़ाए गए पैसों में से लगभग पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये गायब पाए गए हैं। उन्होंने इस मामले में अदालत से सीधे हस्तक्षेप करने और पूरी जांच कराने की मांग की है।

इस विवाद के बढ़ने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर बहुत तेज हो चुका है। विपक्ष ने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं और इसे करोड़ों सनातनी भाई-बहनों की आस्था से खिलवाड़ बताया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि उन्हें अभी तक पैसे गायब होने की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

रामलला के चढ़ावे का हिसाब और प्रक्रिया

राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए करीब चार दर्जन से अधिक बड़ी दान पेटियां लगाई गई हैं। इन पेटियों में देश-विदेश से आने वाले भक्त नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि चढ़ावे के प्रबंधन के लिए एक बेहद मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है।

दान पेटियों से मिलने वाली रकम को एक बेहद सुरक्षित और गोपनीय कमरे में ले जाया जाता है। इस कमरे में केवल अधिकृत अधिकारियों और अधिकृत बैंक कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। यहां पर हर दिन आने वाली नकद राशि को गिनने और उसका पूरा ब्योरा रजिस्टर में दर्ज करने की सख्त व्यवस्था लागू है।

कहाँ दिखी गड़बड़ी और संदेह की वजह

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दान की गिनती के दौरान कुछ विसंगतियां पाई गई हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों के कुल चढ़ावे और बैंक में जमा हुई राशि के बीच के आंकड़ों में अंतर दिखाई दिया था। इसी अंतर को लेकर कुछ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया गया।

गोपनीय कक्ष में नियमित जांच के दौरान अधिकारियों को पैसों के लेन-देन में कुछ विसंगतियां नजर आईं। इसके बाद यह बात बाहर आई कि मंदिर के चढ़ावे की गिनती में शामिल कुछ लोग चुपके से पैसों की हेराफेरी कर रहे थे। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से किसी निश्चित बड़ी रकम की चोरी की पुष्टि मंदिर प्रशासन ने नहीं की है।

बैंक और सीसीटीवी कैमरों की भूमिका

चढ़ावे की गिनती वाले गोपनीय कमरे में सुरक्षा के लिहाज से कई आधुनिक सीसीटीवी (CCTV) यानी बंद सर्किट टेलीविजन कैमरे लगाए गए हैं। इन्हीं खुफिया कैमरों की फुटेज को देखने के बाद जांचकर्ताओं को कुछ संदिग्ध गतिविधियों का पता चला था। फुटेज में कुछ लोग नकदी को गिनते समय उसे छिपाते हुए दिखाई दिए थे।

इस मामले में संदेह के दायरे में आए चार कर्मचारियों को चिह्नित कर उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है। इस जांच प्रक्रिया में दो स्थानीय बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर भी उंगली उठी है, क्योंकि वे भी गिनती के काम से सीधे जुड़े थे। जांच एजेंसियां अब इस बात की कड़ाई से पड़ताल कर रही हैं कि इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल था।

ट्रस्ट ने आरोपों को सिरे से नकारा

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन सभी गंभीर आरोपों और अफवाहों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई बड़ी गड़बड़ी या चोरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के दावों में कोई सच्चाई नहीं है।

ट्रस्ट के अन्य न्यासियों ने भी बयान जारी कर कहा है कि मंदिर में पाई-पाई का लिखित हिसाब रखा जाता है। उन्होंने भक्तों को भरोसा दिलाया है कि रामलला के खजाने को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए कड़े इंतजाम मौजूद हैं। यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ऑडिट प्रक्रिया और वित्तीय सुरक्षा तंत्र

ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर के खातों का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट (Audit) यानी खातों की गहन वित्तीय जांच की जाती है। इस जांच प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के वरिष्ठ अधिकारी और ट्रस्ट के विशेषज्ञ सीधे तौर पर शामिल रहते हैं। यह वित्तीय जांच कई दिनों तक चलती है और इस बार भी यह रूटीन प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

देश के अन्य बड़े मंदिरों की तर्ज पर ही यहां भी आधुनिक वित्तीय प्रणालियों का सहारा लिया जाता है। अब तक की जांच में किसी भी तरह की कोई बड़ी वित्तीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। ट्रस्ट ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही बिना सिर-पैर की बातों और अफवाहों पर ध्यान न दें।

श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा का सवाल

इस विवाद के सामने आने के बाद देश भर के श्रद्धालुओं में भी चिंता देखी जा रही है। राम मंदिर के निर्माण के लिए देश के करोड़ों लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंशदान दिया है। ऐसे में चढ़ावे के पैसे में किसी भी तरह की लापरवाही या हेराफेरी की खबर भक्तों को मानसिक रूप से आहत करती है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जा रहा है। दान कक्ष की निगरानी के लिए अब नए नियम तय किए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके। मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता को बनाए रखना ही ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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